"ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा। "

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"आइना देख कर तसल्ली हुई, हम को इस घर में जानता है कोई। "

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जब से तुम्हारे नाम की मिसरी होंठ से लगाई है मीठा सा गम  मीठी सी तन्हाई है।

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"वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, आदत इस की भी आदमी सी है।"

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"मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता, हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।"

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"हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में, रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया।"

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"आप के बाद हर घड़ी हम ने, आप के साथ ही गुज़ारी है।"

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"बहुत अंदर तक जला देती हैं, वो शिकायते जो बया नहीं होती।

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"मैंने दबी आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने लगी हो? नज़रें झुका कर वो बोली! बहुत।"

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"कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत, मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना।"

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"मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं, हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं। "

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दौलत नहीं शोहरत नहीं,न वाह चाहिए  “कैसे हो?” बस दो लफ़्जों की परवाह चाहिए

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ऐ इश्क... दिल की बात कहूं तो बुरा तो नहीं मानोगे, बड़ी राहत के दिन थे तेरी पहचान से पहले।

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दिल अगर है तो दर्द भी होगा इसका कोई नहीं है हल शायद।

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हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, वक़्त की शाख से लम्हें नहीं तोड़ा करते।

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हमने अक्सर तुम्हारी यादों में, रुक कर अपना ही इंतजार किया है।

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शाम से आंख में नमी सी है... आज फिर आपकी कमी सी है..।

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सुनो... जब कभी देख लुं तुमको.. तो मुझे महसूस होता है कि.. दुनिया खूबसूरत है...।

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एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद... दूसरा सपना देखने के हौसले को "ज़िंदगी" कहते हैं।

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एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद... दूसरा सपना देखने के हौसले को "ज़िंदगी" कहते हैं।

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पलक से पानी गिरा है, तो उसको गिरने दो कोई पुरानी तमन्ना, पिघल रही होगी।

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क्या पता, कब कहां मारेगी। बस कि मैं जिंदगी से डरता हूं..। मौत का क्या है!!! एक बार मारेगी?

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भूल के मुझको अगर आप भी हो सलामत, तो भूला के तुझ को संभलना मुझे भी आता है।

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याद है एक दिन... मेरे मेज पे बैठे बैठे, सिगरेट की डिबिया पर तुमने छोटे से एक पौधे का एक स्केच बनाया था...।  आकर देखो, उस पौधे पर फूल आया है।

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क्या पता, कब कहां मारेगी। बस कि मैं जिंदगी से डरता हूं..। मौत का क्या है!!! एक बार मारेगी?

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हजारों... उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब.. इसी का नाम है जिंदगी... चलते रहिए जनाब...।

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हजारों... उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब.. इसी का नाम है जिंदगी... चलते रहिए जनाब...।

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हजारों... उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब.. इसी का नाम है जिंदगी... चलते रहिए जनाब...।

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बहुत मुश्किल से करता हूं तेरी यादों का कारोबार .... मुनाफा कम है, पर गुजारा हो जाता है।

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मासूम सी हंसी बेवजह ही कभी, होठों पे खिल जाती है अंजान सी खुशी बहती हुई कभी, साहिल पे मिल जाती है ये अंजाना सा डर, अजनबी है मगर खूबसूरत है जी लेने दे, ये लम्हा फिलहाल जी लेने दे।

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ख़ामोशी का हासिल भी इक लंबी सी ख़ामोशी है; उन की बात सुनी भी, हमने अपनी बात सुनाई भी।

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ख़ामोशी का हासिल भी इक लंबी सी ख़ामोशी है; उन की बात सुनी भी, हमने अपनी बात सुनाई भी।

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ख्वाब था शायद ख्वाब ही होगा....

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तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं, तेरे बिना जिंदगी भी लेकिन जिंदगी नहीं।

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जुबाँ सीखने की जरूरत किसी भी उम्र में पड़ सकती है ऐसे ही जैसे इश्क किसी भी उम्र में हो सकता है।

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